ग्वालियर प्रदेश मीडिया कांग्रेस प्रभारी के के मिश्रा के सवाल…

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शिवराज जी का कबूलनामा, सिंधिया समर्थकों के साथ मिलकर कमलनाथ सरकार गिराई, अब यह भी बता दे कि केंद्रीय नेतृत्व से सरकार गिराने के लिए कितना धन मिला, बिकाऊओं और उनके आकाओं को कितना दिया गया? सरकार गिराने की स्वीकारोक्ति के बाद शिवराज जी का हो नार्को टेस्ट.

ग्वालियर-

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी (ग्वालियर-चम्बल संभाग) के.के. मिश्रा ने गुरूवार को ग्वालियर-चंबल अंचल के दिमनी, जौरा, महगांव और गोहद विधानसभा उपचुनाव की चुनावी सभाओं में कांग्रेस के पूर्व विधायक और वर्तमान भाजपा प्रत्याशी गिर्राज डंडोतिया और रणवीर जाटव का नाम लेकर सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा कही गई उस स्वीकारोक्ति को एक गंभीर मामला बताया है जिसमें उन्होंने कहा है कि गिर्राज डंडोतिया को मैने यह कहा था कि कहां फंसे हो यार, साथ आओ सरकार गिरा दो और गोहद के भाजपा प्रत्याशी रणवीर जाटव ने उनसे कहा था कि मुझे सरकार गिराना है, यह सरकार चलना नहीं चाहिये! जनादेश के माध्यम से चुनी गई किसी भी सरकार को भ्रष्टाचार के माध्यम से गिरा देना एक अक्षम्य राजनैतिक अपराध है। मुख्यमंत्री की स्वीकारोक्ति के बाद अब उनका नार्को टेस्ट करवाना चाहिये ताकि प्रदेश सरकार गिराने की सच्चाई सामने आ सके।

मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री यदि धीरे-धीरे कमलनाथ सरकार को गिराने की सच्चाई उगल ही रहे है तो उन्हें अब उस सच्चाई को भी उजागर कर देना चाहिये कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में सरकार गिराने के लिए स्थानीय नेतृत्व को 1250 करोड़ रूपये उधारी के रूप में किस केंद्रीय मंत्री से किसके निर्देश पर दिलवाये थे, उसमें से 440 करोड़ रूपये नगद बिकाऊओं के किस आका को दिये गये थे और एक एक बिकाऊ को दी गई धनराशि कितने करोड़ रूपयों में थी? यहीं नहीं, मुख्यमंत्री जी यह भी बतायें क्या यह भी झूठ है कि प्रदेश के पांच वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों के माध्यम से कोरोना काल में एकत्र 1500 करोड़ रूपयों की राशि में से 1250 करोड़ रूपयों के कर्ज की अदायगी उक्त मंत्री महोदय को कर दी गई है!

मिश्रा ने यह भी कहा कि अपने उक्त बयान के पूर्व मुख्यमंत्री ने कभी यह कहा था कि कमलनाथ सरकार खुद अपने कर्मो से गिरी है बाद में इन्दौर की एक चुनावी सभा में उन्होंने यह सार्वजनिक तौर पर कहा कि यदि तुलसी सिलावट नहीं होते तो मैं मुख्यमंत्री नहीं बन सकता था, अब चुनावी सभाओं में सरकार गिराने की उनकी इस स्वीकारोक्ति ने अपने अक्षम्य राजनैतिक अपराध को सुस्पष्ट कर दिया है। लिहाजा, अब उनके साथ क्या सलूक होना चाहिये? 03 नवंबर को वोटों के आधार पर सरकार चुनने वाली जागरूक जनता नोटों के माध्यम से उनके प्रतिनिधियों के बिक जाने का जबाब ले लेगी।

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