मप्र :उपचुनाव में मुकाबले कहीं नीरस तो कहीं रोचक..

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अगले महीने होने वाले विधानसभा उप चुनावों के लिए दोनों प्रमुख दलों की और से प्रत्याषियों की घोषणा के साथ तस्वीर साफ़ हो गयी है. अधिकांश सीटों पर मुकाबला सीधा होगा ,लेकिन फिलहाल कुछ सीटों को छोड़कर मुकाबला नीरस ही नजर आरहा है,क्योंकि प्रत्याशियों की घोषणा करने में आगे रही कांग्रेस चुनावी तैयारियों में भाजपा के मुकाबले पिछड़ती नजर आ रही है. भाजपा इन उप चुनावों को लेकर पूरी तरह गंभीर दिखाई दे रही है .
प्रदेश में विधानसभा के उप चुनावों की वजह मार्च 2020  में प्रदेश में हुआ कांग्रेस सरकार का तख्ता पलट है .पहले ये चुनाव मात्र २२ सीटों से कांग्रेस के बागी विधायकों के इस्तीफे देने के कारण होना थे,लेकिन बाद में कांग्रेस के तीन और विधायक पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए.तीन अन्य सीटों पर उप चुनाव विधानसभा के सदस्यों के आकस्मिक निधन की वजह से हो रहे हैं .भाजपा ने अपने अनुबंध के अनुरूप कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये सभी पूर्व विधायकों को दोबारा प्रत्याशी बनाया है ,वहीं कांग्रेस ने कुछ सीटों पर भाजपा से ए लोगों को टिकिट देने के साथ नए लोगों को अपना उम्मीदवार बनाया है. इनमें सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम मेंहगांव से पूर्व विधायक हेमंत कटारे का है .
कांग्रेस में टिकिट  वितरण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने फैसले किये हैं .शायद इसी के चलते भाजपा से दोबारा कांग्रेस में आये पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह को बहुत कोशिशों के बावजूद मेंहगांव से टिकिट नहीं दिया गया.मेंहगांव से पूर्व में चौधरी के भाई मुकेश सिंह चौधरी विधायक रह चुके हैं .राकेश सिंह का विरोध किसने किया ये सब जानते हैं .इस जिले में कांग्रेस के क्षत्रप पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह हैं .भिंड में गोहद और मेंहगांव सीट पर उप चुनाव हो रहा है

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