अब वर्दी वाले नेता जी…

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भारत नवाचारों का देश है.भारत में रोज नवाचार होते हैं और हर क्षेत्र में होते हैं.देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने फ़ौजी वर्दी पहनकर एक नया नवाचार स्थापित किया है .फ़ौजी वर्दी में प्रधानमंत्री जी की तस्वीर बेहद आकर्षक है. मोदी जी को इस वर्दी में देखकर मेरे मन में भी ऐसी ही वर्दी पहनने का ख्याल आया लेकिन मै सेना की वर्दी पहनने के लिए बने नियम पढ़कर निराश हो गया .
सेना की वर्दी होती ही इतनी धाँसू है कि उसे देखकर हर किसी का मन बहक जाता है .आम आदमी से लेकर नेता और हमारे चंबल में रहने वाले बाग़ी भी सेना की वर्दी पर लट्टू होते रहे हैं. सेना की वर्दी देश के पोर-पोर को अनुशासित कर देती है .पुलिस की वर्दी में वो बात नहीं है जो सेना की वर्दी में होती है. दुनिया के अनेक देशों में सेना की वर्दी वाले ही शासक हुए हैं .अगर आप उन्हें बिना वर्दी के देख लें तो वे आपको लपू-झन्ना दिखाई देंगे .इसलिए जहाँ लोकतंत्र हैं वहां के नेता भी किसी न किसी बहाने से एक बार सेना की वर्दी जरूर पहनकर देखना चाहते हैं .
भारत में सेना का प्रमुख राष्ट्रपति होता है ,इसलिए राष्ट्रपति सेना की वर्दी पहन भी ले तो कोई हैरानी नहीं होती .पर गनीमत है और सौभाग्य भी कि भारत में किसी राष्ट्रपति ने सेना की वर्दी कभी पहनी नहीं.वर्दी पहनने के लिए एक अदम्य साहस की जरूरत होती है .हमारे देश के नेता जबतब सीमा पर या बैरकों में जाते हैं तो सम्मान स्वरूप सेना की टोपी जरूर धारण कर लेते हैं और वो फबती भी है लेकिन सेना की वर्दी पहनने का दुःसाहस केवल नरेंद्र मोदी जी ने ही दिखाया है. उनसे पहले कोई प्रधानमंत्री फुलड्रेस में दिखाई नहीं दिया .
मैंने तो जब मोदी जी की सेना की वर्दी वाली तस्वीर देखी थी तो मुझे अचानक क्यूबा के राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो की याद आ गयी थी. कास्त्रो सेना की वर्दी में ही फबते थे .फिलिस्तीन के नायक यासर अराफात भी फ़ौजी वर्दी में अलग से ही नजर आते थे .लेकिन सवाल ये है कि क्या खादी पहनने वालों को खाकी और वो भी सेना की खाकी वर्दी पहनना चाहिए ?क्या कोई नेता सेना की वर्दी पहनने की विधिक और नैतिक पात्रता रखता है ? आखिर सेना की वर्दी पहनकर हमारे नेता देश,दुनिया को क्या सन्देश देना चाहते हैं ?
मुझे जहाँ तक पता है उसके मुताबिक सेना की युद्द के दौरान पहने जाने वाली वर्दी को यदि कोई और पहने तो उसके खिलाफ भारतीय कानून में प्रावधान मौजूद हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा-171 के अनुसार, अगर कोई अनाधिकृत तरीके से आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की वर्दी या उसके जैसी दिखने वाली वर्दी पहनते हैं तो उनके खिलाफ धारा-171 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा धारा 21, प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी एक्ट 2005 के तहत अगर कोई सुपरवाईजर, सिक्योरिटी गार्ड आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की वर्दी या उसके जैसी दिखने वाली को पहनता है तो उसे जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
देश के प्रमुख रक्षा विश्लेषक कर्नल अशोक (रिटायर्ड) कहते हैं कि -‘नेताओं को खुद को आर्मी लीडर दिखाने के लोभ से दूर रखना चाहिए। हमें बुलेट को और बैलेट को अलग-अलग रखना है। अगर बुलेट-बैलेट को मिक्स करेंगे तो खतरनाक स्थिति होगी।’ उन्होंने कहा कि जब कभी आर्मी समारोह में कोई मंत्री आता है और जवानों के साथ रहता है तो उन्हें आर्मी की वर्दी पहनाई जाती है। लेकिन किसी नेता का आम लोगों के बीच मैसेज देने के लिए या उसके राजनीतिक इस्तेमाल के लिए आर्मी जैसे कपड़ों का इस्तेमाल गलत है।
इस मामले मै कर्नल अशोक से इत्तफाक रखता हूँ.आप रखते हैं या नहीं ये आप जानें .मेरे मन में अक्सर सेना की वर्दी पहनने वाले नेताओं को देखकर अनेक भयानक सपने आने लगते हैं .हमरे देश की सियासत में अभी तक सेना का कोई दखल है नहीं लेकिन अब पिछले दरवाजे से सेवानिवृत्त होते ही अनेक सैन्य अफसर मंत्री पद तक जा पहुंचे हैं और निश्चित भी उनकी महत्वाकांक्षाएं और भी बड़ी हो सकती हैं .इसलिए बेहतर हो की खादी पहनने वाले नेता सेना की वर्दी से परहेज करें. खुद वरिष्ठ सैन्य अफसरों को इस प्रवृत्ति को हतोत्साहित करना चाहिए. नेताओं के सम्मान के लिए सेना की टोपी ही पर्याप्त है .
दुर्भाग्य ये है की अब सेना में भी चापलूसी की प्रवृत्ति बढ़ रही है. अभी कुछ दिन पहले जब हमारे प्रधानमंत्री जी सेना के बीच भाषण करने गए तो उन्हें ऐसी टोपी पहनने को दी गयी जिसके दोनों और अंग्रेजी में पीएम लिखा हुआ था .भाई पीएम की टोपी पर पीएम लिखकर आप क्या सन्देश देना चाहते हैं ? दुनिया जानती है की पीएम तो पीएम ही हैं उन्हें किसी अतिरिक्त पहचान की जरूरत नहीं है हमने अक्सर देखा है की हमारे नेता मंत्री होने के नाते कभी सैन्य विमान की कॉकपिट में बैठ जाते हैं तो कभी सेना के हैलीकाप्टर को अपना स्कूटर समझकर उसका इस्तेमाल कर डालते हैं .क्या ऐसी हरकतों से परहेज नहीं किया जा सकता ? जो सेना प्रमुख है उसे तो ऐसा करने में संकोच होता है और जो नहीं है उसे कोई संकोच नहीं .गनीमत है की रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सेना की वर्दी पहनने की ललक नहीं दिखाई .
मेरी निजी धारण है की वर्दी वाला केवल सैनिक हो सकता है.वर्दी वाला नेता नहीं हो सकता.सेना की वर्दी पहनकर बीहड़ में आतंक फैलाना आसान है लेकिन सीमा पर जाकर प्राणोत्सर्ग करना उतना ही कठिन है .वर्दी का सम्मान तभी है जब उसे वे ही लोग पहनें जो इसके पात्र हैं या जो इसके लिए पैदा हुए हैं .सेना की वर्दी उन लोगों को कभी धारण नहीं करना चाहिए जिन्हें राजनीति में आये दिन रोज झूठ बोलना पड़ता है या जुमलेबाजी करना पड़ती है .स्कूली बच्चे सेना की वर्दी पहनकर अभिनय कर सकते हैं लेकिन नेतों को ये छूट नहीं दी जाना चाहिए .सेना की वर्दी मोदी जी ने पहनी है इसलिए मै ये सब नहीं लिख रहा.इसे यदि जवाहरलाल नेहरू ने भी पहना हो तो वे भी गलत ही होंगे .मै फिर कहता हूँ की सेना की वर्दी में अपने प्र्धानमनतरि को देखकर मै उन पर लट्टू हूँ .मायने भी कालेज लाइफ में नेवी की वर्दी पहनी थी और वे दिन मुझे आज भी गुदगुदाते हैं ..

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