##सुनी सुनाई …

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किस अफसर की कमाई पहुंची फ्रांस!
प्रदेश और केन्द्र की जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि प्रदेश के किस आईएएस अधिकारी ने ई-टेंडर घोटाले की कमाई शैल कंपनियों और हवाला के जरिए फ्रांस भेजी है। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि प्रदेश के किस आईएएस अधिकारी के रिश्तेदार फ्रांस में रहते हैं? दरअसल ई-टेंडर घोटाले के दौरान एक बड़े समाचार पत्र ने खबर दी थी कि घोटले की मोटी राशि फर्जी कंपनियां और हवाला के जरिए फ्रांस भेजी गई है। इस खबर के आधार पर जांच एजेंसियां बारीकी से जांच में जुटी हुई हैं।

हम सिर्फ भगवान से डरते हैं
मध्यप्रदेश से जुड़े कुछ पत्रकार डिजीटल प्लेटफार्म पर बड़ा धमाका करने के मूड़ में हैं। खबर आ रही है कि बड़े-बड़े संस्थानों से जुड़े आधा दर्जन पत्रकार मौजूदा परिस्थिति में पत्रकारिता की धार को पैना करने स्वयं का एक वैंचर शुरू करने जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पत्रकारों को गोदी मीडिया के कलंक से उभारना बताया जा रहा है। फिलहाल यह पत्रकार मध्यप्रदेश तक सीमित रहेंगे। यह न तो अखबार निकालने के मूड़ में है और न ही भारी-भरकम रकम लगाकर टीवी चैनल लांच करने के मूड में है। इनका टारगेट डिजीटल प्लेटफार्म का उपयोग कर निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुंचाने का है। यह कितने सफल होंगे यह तो भविष्य ही बताएगा। लेकिन इनके प्रयास से पत्रकारिता को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल इन पत्रकारों ने अपनी टैग लाईन जाहिर कर दी है। इनकी डैग लाईन है….हम सिर्फ भगवान से डरते हैं।

किस श्रीवास्तव की खुलेगी लाटरी
इस साल श्रीवास्तव सरनेम के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। यह दोनों श्रीवास्तव रेरा चेयरमैन के लिए आवेदन करने की तैयारी में भी है। यह भी तय माना जा रहा है कि आवेदन कोई भी करे रेरा की कुर्सी इन दोनों में से किसी एक श्रीवास्तव को मिल सकती है। वरिष्ठ आईएएस एपी श्रीवास्तव और मनोज श्रीवास्तव दोनों में से कौन इस कुर्सी पर बैठेगा यह अगले दो महीने में साफ हो जाएगा। वैसे रेरा की कुर्सी के लिए पूर्व मुख्य सचिव एसआर मोहंती भी आवेदन करने की तैयारी कर रहे हैं। इनके अलावा केके सिंह भी दावेदारी कर सकते हैं। इन चारों चेहरों को देखा जाए तो इनमें शिवराज सरकार और संघ की पसंद मनोज श्रीवास्तव हो सकते हैं।

रामबाई का बुरा वक्त
ऐसा लगता है कि बसपा विधायक रामबाई का बुरा वक्त चल रहा है। कमलनाथ सरकार के दौरान रामबाई का जलवा देखने लायक था। कमलनाथ सरकार को समर्थन देने के ऐवज में रामबाई ने बड़ी कीमत वसूली। भोपाल में शानदार बंगला, मनमाफिक अफसरों की पोस्टिंग, हत्या के आरोप में फंसे अपने पति का नाम एफआईआर से हटवाना सहित कई ऐसे कार्य हैं जो कमलनाथ सरकार के दौरान हुए। खास बात यह है कि कमलनाथ सरकार को गिराने सबसे पहले रामबाई सक्रिय हुईं। जीतू पटवारी उन्हें गुडग़ांव के होटल से वापिस लाए थे। भाजपा सरकार बनने के बाद रामबाई ने शिवराज के दो मंत्रियों को जीजा बना लिया है। लेकिन उनका बुरा वक्त शुरू हो गया है। कोर्ट के आदेश से उनके पति को हत्या के आरोपी बना दिया गया है। अब कोई अधिकारी उनके पसंद का पोस्ट नहीं हो रहा। सरकार में कुछ फर्क नहीं है और अब खबर आ रही है कि 10वीं की परीक्षा में बैठी रामबाई यहां भी फैल हो गई हैं।

कमलनाथ का मीडिया प्रेम
मुख्यमंत्री रहते कमलनाथ ने मीडिया का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब कुर्सी से हटने के बाद कमलनाथ का मीडिया प्रेम जागने लगा है। मीडिया से संबंध सुधार की जिम्मेदारी कमलनाथ ने अपने सबसे भरोसेमंद प्रवीण कक्कड़ को सौंपी है। कक्कड़ लगातार कमलनाथ और मीडिया के बीच दूरी को कम करने के प्रयास में लगे हैं। कुछ मीडियाकर्मियों की कमलनाथ से मुलाकात भी कराई जा रही है। इसी योजना के तहत कमलनाथ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मीडियाकर्मियों को कोरोना योद्धा मानते हुए उन्हें प्राथमिकता पर वैक्सीन लगाने के लिए पत्र लिखा है। अब खबर आ रही है कि मीडिया में कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखने के लिए एक बार फिर केके मिश्रा को भोपाल लाने पर विचार शुरू हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि कक्कड़, जीतू पटवारी और केके मिश्रा मिलकर कमलनाथ और मीडिया की दूरी दूर करने का काम करेंगे।

चर्चा में अफसरों के बंगले
मप्र की राजधानी भोपाल के बाघ भ्रमण क्षेत्र के लो-डेंसिटी एरिये में बने प्रदेश के अफसरों के महलनुमा बंगले आजकल चर्चा का विषय बने हुए हैं। टाउनकंट्री प्लानिंग से लेकर नगर-निगम और मंत्रालय तक इन बंगलों की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल रिटायर और मौजूदा आईएएस अफसरों ने बरखेड़ी खुर्द गांव में बड़े-बड़े प्लाट लेकर महलनुमा बंगले तो तान दिए लेकिन नियमानुसार यहां सिर्फ 647 वर्ग फीट के निर्माण की अनुमति थीं। चर्चा है कि अधिकारियों की आपसी फूट के कारण यह मामला गरमा रहा है। अब आम लोग भी इसमें रूचि ले रहे हैं। यदि नियम विरुद्ध बंगले बने हैं तो आम आदमी की तरह क्या इन अफसरों के बंगलों तक भी बुलडोजर पहुंचेगा।

और अंत में…
मप्र में कथित रूप से काले धन का लेनदेन करने के आरोप में फंसे प्रदेश के तीन आईपीएस और एक राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पर कार्रवाई को लेकर सरकार ने सुस्ती ओढ़ ली है। केन्द्रीय चुनाव आयोग ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे लेकिन राज्य सरकार आयोग के भेजे दस्तावेजों को एफआईआर के लिए पर्याप्त नहीं मान रही है। गृह विभाग इस मामले में कन्फ्यूज है। पहले चर्चा थी कि इन अधिकारियों को नोटिस देकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की जाएगी। नोटिस तैयार भी हुआ लेकिन आज तक इन अधिकारियों को नहीं भेजा गया। चर्चा है कि एफआईआर के लिए जो दस्तावेज भेेजे गए हैं उन पर सुप्रीम कोर्ट ही कई बार कह चुका है कि यह कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं है। तो क्या वास्तव में इन अफसरों को क्लीनचिट मिलेगी?

साभार..रविन्द्र जैन..

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