पेट्रोल-डीजल पर वेट की दर को कम किया जाए ः

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एमपीसीसीआई वित्तीय वर्ष ः 2021-22 हेतु राज्य बजट में शामिल किए जाने हेतु एमपीसीसीआई के सुझाव..

ग्वालियर, म. प्र. विधानसभा के बजट सत्र में आगामी, वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले राज्य बजट हेतु आज एमपीसीसीआई ने सुझाव भेजे ।
एमपीसीसीआई, अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया है कि चेम्बर द्वारा आज पत्र के माध्यम से राज्य के वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री-माननीय श्री जगदीश देवड़ा को प्रदेश के बजट 2021-22 हेतु सुझाव भेजे गए हैं । माननीय वित्तमंत्री जी को पत्र के माध्यम से भेजे गए प्रमुख सुझाव निम्नानुसार हैं ः-
* पेट्रोल-डीजल पर वेट की दर को कम किया जाए ः राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर सम्पूर्ण देश में ‘वेट’ सर्वाधिक वसूल किया जा रहा है । म. प्र. में पेट्रोल-डीजल पर कर की दरें पड़ौसी राज्यों से काफी अधिक होने के कारण प्रदेश में विकास की गति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि इससे माल ढुलाई पर सीधा असर पड़ रहा है । वहीं जो पेट्रोल-डीजल से संबंधित व्यवसाई हैं, उनके व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है । इसलिए यह आवश्यक है कि राज्य में पेट्रोल-डीजल पर वैट की दर को पड़ौसी राज्यों से कम किया जाए, ऐसा होने से विक्रय की मात्रा बढ़ेगी, जिससे अधिक विक्रय होने से टैक्स की अधिक वसूली होगी और इससे राजस्व पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा । पेट्रोल-डीजल पर वैट की दर कम होने से राज्य के आम नागरिकों सहित व्यवसाईयों एवं उद्योगपतियों को भी महँगाई की मार के साथ-साथ मंदी के इस वर्तमान समय में कुछ राहत मिलेगी ।
* सेल्स टेक्स और वैट में जमा एफडीआर की वापसी हेतु प्रावधान किया जाए ः प्रदेश में जब सेल्स टैक्स की व्यवस्था थी, उसके उपरांत वेट टेक्स का प्रावधान लाया गया, दोनों ही रजिस्ट्रेशन में एफडीआर संयुक्त नाम से बनवाकर जमा कराई गई थी, लेकिन अब न तो विक्रय कर का प्रावधान है और न ही वेट टेक्स । वहीं वह पैसा बैंकों में ब्लॉक है । कारण एफडीआर संयुक्त नाम से है । अतः वह एफडीआर वापसी का प्रावधान किया जाना चाहिए ।
* प्रोफेशनल टैक्स को समाप्त किया जाए ः व्यवसाईयों पर जीएसटी सहित अन्य कई कर लागू हैं ।  व्यवसाई का विभिन्न करों की कार्यवाही में ही अधिकतम समय व्यतीत हो रहा है, जिसके कारण वह अपने कारोबार पर पूरी तरह से ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रहे हैं । अतएव प्रोफेशनल टैक्स को समाप्त कर, प्रदेश के व्यवसाईयों को राहत प्रदान की जाए ।
* स्टॉम्प ड्यूटी को 20% तक कम किया जाए ः म. प्र. में स्टॉम्प ड्यूटी सर्वाधिक होने के कारण इसका सीधा असर, रियल स्टेट के व्यापार पर पड़ रहा है । रियल स्टेट में मंदी के कारण राज्य में रोजगार के अवसर भी कम हो रहे है । इसलिए यह आवश्यक है कि प्रदेश में स्टॉम्प ड्यूटी को 20% तक कम की जाए, जिससे रियल स्टेट के व्यापार में वृद्धि हो सके । साथ ही, ऐसा होने से प्रदेश में लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ।
* बैंक मॉर्गेज में स्टाम्प ड्यूटी अन्य प्रदेशों के मुकाबले की जाए ः बैंक लोन पर 0.25% इक्यिूटल मॉर्गेज चार्ज को कम करना चाहिए । उत्तरप्रदेश में यह रु. 10,000/- एवं दिल्ली में रु. 1,000/- के स्टॉम्प पेपर पर यह सुविधा दी जाती है ।
* ट्रेड लायसेंस को समाप्त किया जाए ः नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के पत्र क्र. 6052(ए), दिनांक 22.03.2018 के आधार पर नगर-निगम, ग्वालियर द्बारा ट्रेड लायसेंस आरोपित किए जाने का निर्णय लिया है, परन्तु इस पत्र में कहीं भी नगर निगम अधिनियम की किसी धारा का उल्लेख न किया जाना, इसे अवैधानिक रूप से लगाए जाने का प्रमाण है । शासन को भी यह शक्ति कहां से प्राप्त हुई, जबकि कारपोरेशन एक्ट है और नगर निगम की पूरी इलेक्टेड बॉडी मौजूद है फिर शासन कैसे यह निर्देश दे सकता है कि नगर निगम द्वारा इस प्रकार कार्य किया जाए । व्यवसाई जब शॉप एक्ट में रजिस्टर्ड हैं, फिर नया ट्रेड लायसेंस क्यों मांगा जा रहा है, जबकि इसका कोई औचित्य नहीं है । इस प्रकार यह अवैधानिक रूप से विधि की मंशा के विपरीत लगाया गया है । वहीं आपके द्वारा व्यवसाईयों के हितार्थ निर्णय लेते हुए शॉप एक्ट रजिस्ट्रेशन को एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद रिन्यूवल की वाध्यता को खत्म कर स्वागत योग्य निर्णय लिया गया है । अतएव निगम परिषद के ठहराव क्रमांक 186 दिनांक 16.09.2019 पर तत्काल रोक लगाई जाए एवं नगर पालिक निगम, ग्वालियर को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया जाए कि व्यापारियों को ट्रेड लायसेंस बनवाने के लिए बाध्य न किया जाए और इस ठहराव को निरस्त करने के लिए भी उचित कार्यवाही की जाए ।
* छोटे तलघर जिनमें पार्किंग होना संभव नहीं, उन्हें अर्थदण्ड के साथ वैध किया जाए ः ग्वालियर शहर में काफी समय से तलघरों के विरुद्ध एक अभियान चलाया जा रहा है, जिसके कारण असुविधाजनक स्थिति उत्पन्न हो रही है । नगर-निगम के कर्मचारी किसी भी समय, किसी भी बाजार में पहुँच कर तलघरों की तोड़फोड़ कर जाते है । छोटे तलघर जिनका आकार 1000 वर्गफुट तक है । इनमें स्वीकृति प्राप्त व बिना स्वीकृति के निर्मित दोनों प्रकार के तलघर हो सकते हैं । छोटे तलघरों में पार्किंग संभव नहीं है, परन्तु ये स्टोरेज व अन्य अनुषंगी कार्यों हेतु उपयोगी होते हैं । इस प्रकार के तलघरों में जिन्हें अनुमति प्राप्त नहीं है, उन्हें शासन की ओर से नियमित करने हेतु अर्थदण्ड के साथ एक अवसर दिया जाना चाहिए । यदि शासन, छोटे भवन स्वामियों को उनके छोटे तलघरों को नियमित करने का एक उचित अवसर देता है, तो यह पूर्णतः एक तार्किक, उचित, वैधानिक व सराहनीय कार्य होगा । अतएव व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में स्थित तलघरों की आए दिन की जा रही तोड़फोड़ की कार्यवाही पर विराम लगाकर, इनके नियमतीकरण हेतु उचित प्रावधान बनाए जाएँ और तलघरों के मालिकों को एक अवसर प्रदान किया जाए, जिससे शहर के व्यवसाई बगैर किसी भय के अपना कारोबार सुचारू रूप से संचालित कर सकें और शासन को भी राजस्व की प्राप्ति हो सके ।

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